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16 अगस्त 2017

क़ुरान का सन्देश

अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब (क़ुरान) की आयतें है और तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से जो कुछ तुम्हारे पास नाजि़ल किया गया है बिल्कुल ठीक है मगर बहुतेरे लोग ईमान नहीं लाते (1)
ख़ुदा वही तो है जिसने आसमानों को जिन्हें तुम देखते हो बग़ैर सुतून (खम्बों) के उठाकर खड़ा कर दिया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और सूरज और चाँद को (अपना) ताबेदार बनाया कि हर एक वक़्त मुक़र्ररा तक चला करते है वहीं (दुनिया के) हर एक काम का इन्तेज़ाम करता है और इसी ग़रज़ से कि तुम लोग अपने परवरदिगार के सामने हाजि़र होने का यक़ीन करो (2)
(अपनी) आयतें तफसीलदार बयान करता है और वह वही है जिसने ज़मीन को बिछाया और उसमें (बड़े बड़े) अटल पहाड़ और दरिया बनाए और उसने हर तरह के मेवों की दो दो किस्में पैदा की (जैसे खट्टे मीठे) वही रात (के परदे) से दिन को ढाक देता है इसमें शक नहीं कि जो लोग और ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशनियाँ हैं (3)
और खुरमों (खजूर) के दरख़्त की एक जड़ और दो शाखें और बाज़ अकेला (एक ही शाख़ का) हालांकि सब एक ही पानी से सीचे जाते हैं और फलों में बाज़ को बाज़ पर हम तरजीह देते हैं बेशक जो लोग अक़ल वाले हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशनियाँ हैं (4) और अगर तुम्हें (किसी बात पर) ताज्जुब होता है तो उन कुफ्फारों को ये क़ौल ताज्जुब की बात है कि जब हम (सड़गल कर) मिट्टी हो जायंगें तो क्या हम (फिर दोबारा) एक नई जहन्नुम में आयंगे ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार के साथ कुफ्र किया और यही वह लोग हैं जिनकी गर्दनों में (क़यामत के दिन) तौक़ पड़े होगें और यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये इसमें हमेशा रहेगें (5)
और (ऐ रसूल) ये लोग तुम से भलाई के क़ब्ल ही बुराई (अज़ाब) की जल्दी मचा रहे हैं हालांकि उनके पहले (बहुत से लोगों की) सज़ाएँ हो चुकी हैं और इसमें शक नहीं की तुम्हारा परवरदिगार बावजूद उनकी शरारत के लोगों पर बड़ा बख़शिश (करम) वाला है और इसमें भी शक नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सख़्त अज़ाब वाला है (6)
और वो लोग काफिर हैं कहते हैं कि इस शख़्स (मोहम्मद) पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई निशानी (हमारी मर्ज़ी के मुताबिक़) क्यों नहीं नाजि़ल की जाती ऐ रसूल तुम तो सिर्फ (ख़ौफे ख़़ुदा से) डराने वाले हो (7)
और हर क़ौम के लिए एक हिदायत करने वाला है हर मादा जो कि पेट में लिए हुए है और उसको ख़़ुदा ही जानता है व बच्चा दानियों का घटना बढ़ना (भी वही जानता है) और हर चीज़ उसके नज़दीक़ एक अन्दाजे़ से है (8)
(वही) बातिन (छुपे हुवे) व ज़ाहिर का जानने वाला (सब से) बड़ा और आलीशान है (9)
तुम लोगों में जो कोई चुपके से बात कहे और जो शख़्स ज़ोर से पुकार के बोले और जो शख़्स रात की तारीक़ी (अंधेरे) में छुपा बैठा हो और जो शख़्स दिन दहाड़े चला जा रहा हो (10)

15 अगस्त 2017

तिरंगे का दर्द मिडिया के खिलाफ भी था ,

कहते है बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी ,,,,सच बोलोगे तो मिर्ची लग जाएगी लेकिन मुझे दिल की आवाज़ रुंधे हुए गले से कहना ही तो कहना है ,,आवाज़ चाहे दूर तक जाए या न जाए मिर्ची लगे तो लगे ,,,,आप समर्थन करो या फिर विरोध ,,आप कोंग्रेसी कहो या कुछ और ,लेकिन टूटे हुए दिल ,,रुंधे हुए गले से ,,बटवारे के दर्द से आहत इस तिरंगे का दर्द तो मुझे बयान करना ही होगा ,,,,देश भर में सियासी तोर पर लोगो को आकर्षित करने के लिए सिर्फ और सिर्फ सियासी तिरंगा यात्राएं थी ,,,कोटा में भी यह यात्राएं निकली शान से निकली ,,तिरंगा शान से निकला ,,लेकिन दुखी और आहत तिरंगा ,,हर यात्रा से यह पूंछ रहा था ,,मुझे सियासी पार्टियों में क्यों बाँट दिया है ,,में देश और देशवासियो का हूँ ,,मुझे सियासी पार्टियों में क्यों बांटा गया है ,,आहत तिरंगे का और भी रुला देने वाला सवाल था ,,कोई बात नहीं ,,सियासी पार्टियां अलग अलग है ,,तिरंगे के नाम पर अलग अलग कर लो ,,लेकिन एक ही सियासी पार्टी की ,,एक ही विचारधारा वाली पार्टी मुझे क्यों बाँट रही है ,तिरंगे का अफ़सोस था ,,एक तिरंगा बटवारे हज़ार ,,सियासी पार्टियों में फिर सियासी पार्टियों की ब्रांचेज में ,,,तिरंगे का दर्द था ,,जो लोग मुझे हर जगह लहराने की ज़िद करते है ,,में उनके अपने कार्यालयों में भी ,,उनके अपने कार्यक्रमों में भी इठलाना चाहता हूँ ,,उनके कार्यक्रमों में भी में राष्ट्रभक्ति का संदेश बनकर उनके अपने झंडे से ऊपर बहुत ऊपर ,,राष्ट्रवाद के ओरिजनल संदेश के साथ लहराना चाहता हूँ ,,तिरंगे का दर्द मिडिया के खिलाफ भी था ,,,आज कोटा के अख़बारों में चैनलों में ,,तिरंगे यात्रा के नाम की अलग अलग प्रभावशाली लोगो के गुट ,,लोगो के नाम से खबर थी ,,लेकिन तिरंगे को सजाने ,,संवारने ,,खबूसूरत उत्साहवर्धन कर देने वाली झांकियों का बच्चो के हौसलों का न तो ज़िक्र था न ही उनका विवरण ,,उनके फोटो विशेष तोर पर अखबारों की सुर्खियां बनाये गए थे ,,एक मुफ्ती ने तिरंगे पर महरबानी की तिरंगा फहराने की इजाज़त दी और राष्ट्रगान गाने से इंकार कर दिया ,जैसे राष्ट्रभक्ति ,,राष्ट्रवाद बांटने का लाइंसेंस इन मुफ़्ती जनाब को मिल गया हो ,,अफसोस होता है जब मज़हबी लोग ,,बिना किसी सोच ,,बिना किसी विचार के ऐसी बेवक़ूफ़िया करते ही जिनका इस्लाम से कोई लेना देना नहीं ही ,धर्म से कोई लेना देना नहीं है ,,शर्म आना चाहिए तिरंगे को सियासी पार्टियों ,,सियासी पार्टियों की गूटबाजियो ,,मज़हब ,,विचारधाराओं में बांटने वालों को ,,उपेक्षित करने वाले मीडिया कर्मियों को ,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

अलगाववादियों जितनी ताक़त तुम देश को तोड़ने में ,,देश का तिरंगा बदलने में लगा रहे हो ,,उससे एक चौथाई ताक़त भी राष्ट्र निर्माण ,,नफरत का वातावरण बदल कर मोहब्बत का बातावरण बनाने में खर्च करोगे तो सच,, यह देश स्वर्ग बन जाएगा

हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को हटाकर ,,अपना ध्वज फहराने की कोशिशों में जुटे अलगाववादियों ने देख लिया है ,,समझ लिया है ,,उनके लोगो को वह चाहे जितनी बढ़ी कुर्सी पर बिठा दे ,,लेकिन हमारे देश के लोग ,,हमारे देश का संविधान ,,ऐसे लोगो द्वारा प्रशिक्षित लोगो को भी ,,तिरंगे के गुणगान पर मजबूर कर देता है ,,उनके हाथो से ही तिरंगे को लहरवाता है और फिर इन बेचारे अलगाववादियों के सपने ,,तिरंगे को हटाकर अपना ध्वज फहराने के सपने ,चकनाचूर हो जाते है ,,,हमारा देश ,,हमारे देश के लोग ,,हमारे देश के संस्कार ,,हमारे देश की संस्कृति इसीलिए ज़िंदाबाद कहलाती है ,,,यहां तिरंगे को कोई नहीं बदल सकता ,,यहाँ ,,धर्मनिरपेक्षता को ,,क़ौमी एकता को कोई छिन्न भिन्न नहीं कर सकता ,,अलगाववादियों जितनी ताक़त तुम देश को तोड़ने में ,,देश का तिरंगा बदलने में लगा रहे हो ,,उससे एक चौथाई ताक़त भी राष्ट्र निर्माण ,,नफरत का वातावरण बदल कर मोहब्बत का बातावरण बनाने में खर्च करोगे तो सच,, यह देश स्वर्ग बन जाएगा ,,सच ,,,यह मेरा भारत महान बन जाएगा ,,,कुछ चंद नामाकूल लोगो के खातिर पुरे लोगो को दोष देकर वातावरण मत बिगाड़ो यार ,,कभी अपने पड़ोस में रह रहे लोगो को भी नापो तोलो ,,,हर शख्स यु बेवफा नहीं होता ,,तुम सभी खराब नहीं ,,कुछ लोग है जो तुम्हे सभी को खराब कहलवा रहे है ,,और वह गलत है ,,जो अच्छे है वह आदरणीय है ,,हम सब खराब नहीं है ,,कुछ खराब है जो सभी को खराब कहलवा रहे है ,,यह भी गलत है ,,ज़रा सोचो ,,समझो यह देश हमारा अपना है ,,यह तिरंगा हमारा अपना है फिर क्यों हम ,,इसे हटाकर एक नया ध्वज लाना चाहते है ,,, फिर चाहे वह हरा हो या फिर केसरिया ,,,तिरंगा ज़िंदाबाद ,,हिंदुस्तान ज़िंदाबाद ,,जय हिन्द ,,जय भारत ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सुदामा कितना ही गरीब हो उससे मित्रता उसे मान सम्मान देकर निभाना ही होगा

खुले घाट ,,खुली नदी ,पर महिलाये नग्न ,,अर्ध नग्न ,,मदहोश होकर न नहाये ,,इसकी रोकथाम के लिए हंसी मज़ाक़ में ही महिलाओं को तहज़ीब का संदेश देने ,,,हर घर में घी ,,मक्खन ,,दूध ,दही ,,की पैदावार के लिए गो पालन करने ,,इनका व्यवसाय न करने ,,खुद खाकर बलिष्ठ होने ,,बिक्री करने वालों का विरोध करने का संदेश हो ,,,मातृत्व प्रेम ,,,सुदामा से मित्रता के संदेशवाहक ,,,सत्यमेवजयते ,,के धर्म युद्ध ,,जेहाद में ,,बुराई के खिलाफ बुराई को जड़ से नष्ट करवाने वाले ,,राक्षसों का अंत कर ,,पीड़ितों का संरक्षण करने वाले ,,जेल में जन्म लेकर भी दुसरो को आज़ादी देने वाले विनम्र ,,चंचल ,,,वीर योद्धा ,,साहसी ,,युद्ध और प्यार में सब जायज़ है का संदेश देने वाले ,,युद्ध में बुराई का अंत करते वक़्त ,,अपना पराया भूलकर बुराई का अंत करने का संदेश ,,गीता का ज्ञान देने वाले ,श्रीकृष्ण का जन्म के जश्न का समय होने वाला है ,,सभी को बधाई ,,मुबारकबाद ,,हम श्रीकृष्ण के हर संदेश को बारीकी से समझकर अपने जीवन में अंगीकार कर सके ,,तो कोई दुर्योधन ,,द्रोपदी का चीर हरण न कर सकेगा ,,,कोई दुर्योधन ,,,भीष्म पितामह ,,द्रोणाचार्य ,,,बुराई का साथ देकर भी जीत नहीं सकेगा ,,,जो धर्म के खिलाफ बुराई के साथ रहेगा उसके प्राण निकलने तक वोह कष्ट में रहेगा ऐसा संदेश सभी को मिलेगा ,,कंस को मरना ही है ,,सुदामा कितना ही गरीब हो उससे मित्रता उसे मान सम्मान देकर निभाना ही होगा ,सर्वशक्तीमान होने के बाद भी ,,शक्तीयो का दुरूपयोग नहीं सिर्फ सदुपयोग करना सीखना होगा ,,,बुरे लोगो की पहले गलतियां माफ़ कर उन्हें माफ़ी का ,,सुधरने का मौक़ा देकर ,,नहीं मानने पर ही उनका अंत करना होगा ,,यह सब सीखना होगा ,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

क़ुरान का सन्देश

और अक्सर लोगों की ये हालत है कि वह ख़ुदा पर इमान तो नहीं लाते मगर शिर्क किए जाते हैं (106)
तो क्या ये लोग इस बात से मुतमइन हो बैठे हैं कि उन पर ख़ुदा का अज़ाब आ पड़े जो उन पर छा जाए या उन पर अचानक क़यामत ही आ जाए और उनको कुछ ख़बर भी न हो (107)
(ऐ रसूल) उन से कह दो कि मेरा तरीका तो ये है कि मै (लोगों) को ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ मैं और मेरा पैरव (पीछे चलने वाले) (दोनों) मज़बूत दलील पर हैं और ख़ुदा (हर ऐब व नुक़स से) पाक व पाकीज़ा है और मै मुशरेकीन से नहीं हूँ (108)  
और (ऐ रसूल) तुमसे पहले भी हम गाँव ही के रहने वाले कुछ मर्दों को (पैग़म्बर बनाकर) भेजा किए है कि हम उन पर वही नाजि़ल करते थे तो क्या ये लोग रुए ज़मीन पर चले फिरे नहीं कि ग़ौर करते कि जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं उनका अन्जाम क्या हुआ और जिन लोगों ने परहेज़गारी एख़्तेयार की उनके लिए आखि़रत का घर (दुनिया से) यक़ीनन कहीं ज्यादा बेहतर है क्या ये लोग नहीं समझते (109)
पहले के पैग़म्बरो ने तबलीग़े रिसालत यहाँ वक कि जब (क़ौम के इमान लाने से) पैग़म्बर मायूस हो गए और उन लोगों ने समझ लिया कि वह झुठलाए गए तो उनके पास हमारी (ख़ास) मदद आ पहुँची तो जिसे हमने चाहा नजात दी और हमारा अज़ाब गुनेहगार लोगों के सर से तो टाला नहीं जाता (110)
इसमें शक नहीं कि उन लोगों के किस्सों में अक़लमन्दों के वास्ते (अच्छी ख़ासी) इबरत (व नसीहत) है ये (क़ुरान) कोई ऐसी बात नहीं है जो (ख्वाहामा ख्वाह) गढ़ ली जाए बल्कि (जो आसमानी किताबें) इसके पहले से मौजूद हैं उनकी तसदीक़ है और हर चीज़ की तफसील और इमानदारों के वास्ते (अज़सरतापा) हिदायत व रहमत है (111)
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