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19 फ़रवरी 2018

क़ुरान का सन्देश

(ऐ रसूल) यही वह लोग हैं जिनपर ख़ुदा ने लानत की है और जिस पर ख़ुदा ने लानत की है तुम उनका मददगार हरगिज़ किसी को न पाओगे (52)  क्या (दुनिया) की सल्तनत में कुछ उनका भी हिस्सा है कि इस वजह से लोगों को भूसी भर भी न देंगे (53)
यह ख़ुदा ने जो अपने फ़ज़ल से (तुम) लोगों को (कु़रान) अता फ़रमाया है इसके रश्क पर जले जाते हैं (तो उसका क्या इलाज है) हमने तो इबराहीम की औलाद को किताब और अक़्ल की बातें अता फ़रमायी हैं और उनको बहुत बड़ी सल्तनत भी दी (54) फिर कुछ लोग तो इस (किताब) पर ईमान लाए और कुछ लोगों ने उससे इन्कार किया और इसकी सज़ा के लिए जहन्नुम की दहकती हुयी आग काफ़ी है (55)
(याद रहे) कि जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया उन्हें ज़रूर अनक़रीब जहन्नुम की आग में झोंक देंगे (और जब उनकी खालें जल कर) जल जाएंगी तो हम उनके लिए दूसरी खालें बदल कर पैदा करे देंगे ताकि वह अच्छी तरह अज़ाब का मज़ा चखें बेशक ख़ुदा हरचीज़ पर ग़ालिब और हिकमत वाला है (56)
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए हम उनको अनक़रीब ही (बेहिश्त के) ऐसे ऐसे (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुँचाएंगे जिन के नीचे नहरें जारी होंगी और उनमें हमेशा रहेंगे वहां उनकी साफ़ सुथरी बीवियाँ होंगी और उन्हे घनी छाव में ले जाकर रखेंगे (57)
ऐ ईमानदारों ख़ुदा तुम्हें हुक्म देता है कि लोगों की अमानतें अमानत रखने वालों के हवाले कर दो और जब लोगों के बाहमी झगड़ों का फै़सला करने लगो तो इन्साफ़ से फै़सला करो (ख़ुदा तुमको) इसकी क्या ही अच्छी नसीहत करता है इसमें तो शक नहीं कि ख़ुदा सबकी सुनता है (और सब कुछ) देखता है (58)
ऐ ईमानदारों ख़ुदा की इताअत करो और रसूल की और जो तुममें से साहेबाने हुकूमत हों उनकी इताअत करो और अगर तुम किसी बात में झगड़ा करो बस अगर तुम ख़ुदा और रोज़े आखि़रत पर इमान रखते हो तो इस अम्र में ख़ुदा और रसूल की तरफ़ रूजू करो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है और अन्जाम की राह से बहुत अच्छा है (59)
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों की (हालत) पर नज़र नहीं की जो ये ख़्याली पुलाओ पकाते हैं कि जो किताब तुझ पर नाजि़ल की गयी और जो किताबें तुम से पहले नाजि़ल की गयी (सब पर) ईमान लाए और दिली तमन्ना ये है कि सरकशों को अपना हाकिम बनाएं हालांकि उनको हुक्म दिया गया कि उसकी बात न मानें और शैतान तो यह चाहता है कि उन्हें बहका के बहुत दूर ले जाए (60)

18 फ़रवरी 2018

ज़िले भी 34 हो गए है ,ऐसे में क्या बार कौंसिल सदस्यों की संख्या का प्रतिनिधित्व दोगुना नहीं होना चाहिए ,

वकील साथियों बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान एडवोकेट एक्ट 1961 के तहत बनाया गया तब बार कौंसिल वकीलों की संख्या के हिसाब से 25 सदस्यों की बनाई गयी थी ,,दोस्तों आज गुणात्मक संख्या में वकीलों की संख्या कई हज़ार गुना बढ़ी है ,,जबकि ज़िले भी 34 हो गए है ,ऐसे में क्या बार कौंसिल सदस्यों की संख्या का प्रतिनिधित्व दोगुना नहीं होना चाहिए ,,और हाँ वोटिंग में प्रथम वरीयता द्वितीय वरीयता खत्म कर ,,,प्रथम अधिकतम के बाद द्वितीय अधिकतम ,फिर तृतीय अधिकतम वोटो के अनुसार निर्वाचन नहीं होना चाहिए ,,वोट डालने के मामले में अंग्रेजी के अंक लिखवाने की जगह मुहर या फिर वन ,टू ,,थ्री नहीं होना चाहिए ,,क्योंकि काउंटिंग के वक़्त अंक एक के आगे अगर दूसरा अंक जोड़ दिया तो क्या एक अंक के आगे दो लिखने से इसे बारह नहीं पढ़ा जा सकता ,,जहाँ गलतियां ,या गड़बड़ होने की संभावना हो ,,क्या इस व्यवस्था को नहीं बदलना चाहिए ,,क्या बार कौंसिलर के लिए दुबारा चुनाव लड़ने पर पाबंदी नहीं चाहिए ,,क्या बार कौंसिलर हाईकोर्ट का जज नहीं बनेगा ,,,सरकारी महाधिवक्ता या बढ़ा पद नहीं लेगा ऐसी पाबंदी नहीं होना चाहिए ,ताकि इस चुनाव में वही निर्वाचित होकर आये जो निजी फायदे या रसूकात बढ़ाने के लिए नहीं सिर्फ वकीलों के लिए संघर्ष करने ,,उन्हें इंसाफ दिलाने ,उनकी कल्याणकारी व्यवस्थाओ को व्यवस्थित करने के लिए आये ,,ऐसे लोग जीत कर आये ,जो खुद को सरकारी अफसर समझने की जगह वकीलों के हक़ में सरकार और न्यायिक प्रबंधन से टकराने का साहस रखते हो ,अपने निजी मुक़दमो की सुनवाई की फ़िक्र किये बगैर न्यायिक प्रबंधन से आँखो में आँख डालकर ,,वकीलों के हक़ के लिए संघर्ष कर ,सके ,यह न कहें ,हम तो अधिकारी है ,संवैधानिक संस्था है हड़ताल नहीं कर सकते ,,वकीलों के हक़ के लिए संघर्ष नहीं कर सकते ,,यह न कहे हम तो हर बार जीतते आये है ,हमे जीतने से कोन रोकेगा ,, यह न कहे ,,वकीलों की मृत्यु पर ढाई लाख रूपये बहुत है ,,हमारे परिजन तो नहीं लेंगे तुम्हारे परिजन को भी नहीं लेना चाहिए ,,यह राशि भी बहुत है ,,यह भी न कहे ,,के वकीलों के कल्याण ,नए अधिवक्ताओं को भत्ता देने की वेलफेयर व्यवस्था देने वाले लोग जेल जाएंगे ,,ऐसे पांच सितारा संस्कृति के लोगो से क्या हमे बचना नहीं चाहिए ,,,चुने ऐसे को ,जो आपका अफसर न हो ,,चुने ऐसे को जो आपका हमदर्द ,आपका भाई ,आपके सुख दुःख में आपके साथ खड़ा हो ,,,जो आपके लिए ,किसी भी तरह का संघर्ष करने के लिए तत्पर हो ,,,,,लड़ने के पहले ही हारने वाला ,या फिर भाईसाहबो के इशारे पर चलने वाला न हो ,,,,,,फैसला आपका ,,जीत बेहतर बार कौंसिलर्स की ,,एडवोकेट अख्तर अली खान ,अकेला , कोटा प्रत्याक्षी बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान , 28 मार्च को ,प्रथम वरीयता का वोट देकर अनुग्रहित करे ,

मोहब्बत का

मोहब्बत का
यह दिखावा ,,
मोहब्बत का
यह छलावा ,,
बस और नहीं ,
खिलोने की तरह खेले
जी भरा खिलौना तो दिया
ज़रा दस्तूर यह मोहब्बत का
अब बदलना होगा ,,अख्तर

शुक्र है

शुक्र है खुदा का
तुम्हारी सारी खुशियां
तुम्हारी सारी किलकारियां
तुम्हारी सारी रंगीनियत
लोट आयी है ,
मोह्हबत में
मुझे ठुकराने के बाद ,,
में खुश हूँ ,,
में खुश हूँ
तुम्हारी इन्ही
खुशियों के साथ ,,अख्तर
*हजरत जंगलीशाह बाबा 73वें उर्स का पोस्टर विमोचन*,
होगा कुलहिंद मुशायरा शायरों के नाम तय, कव्वाली में आएंगे चाँद कादरी
कोटा , हजरत जंगलीशाह बाबा का 73वां उर्स 12, 13,14, मार्च को अकीदत के साथ मनाया जायेगा रविवार को दरगाह परिसर में हजरत जंगली शाह बाबा उर्स के पोस्टर का विमोचन दरगाह गद्दीनसीन अजीज जावा, उर्स कमेटी सदर ज़फर अली, नायब सदर पार्षद मोहम्मद हुसैन, के संयोजन में संपन्न हुआ सदर जफ़र अली ने बताया की उर्स 12 मार्च सुबह 8 बजे कुरान ख्वानी की रस्म के साथ शुरू होगा जो 14 मार्च शाम 7 बजे कुल की रस्म के साथ ख़त्म होगा 12 मार्च रात 8 बजे कुलहिन्द मुशायरा होगा मुशायरे में मुजफ्फर नगर से खुर्शीद हैदर, आगरा से अनवार अमान, शकूर अनवर, डॉ ज़ेबा फिज़ा, अतहर उज्जैनी, हाजी जमील कादरी, तबस्सुम कशिश, अजीम देवासी, डॉ फरीद फरीदी, मुस्तफा आलम, चाँद शेरी,का प्रोग्राम होगा 13 मार्च को हिंदुस्तान के मशहुर कव्वाल चाँद कादरी द्वारा कव्वाली का प्रोग्राम होगा पोस्टर विमोचन में अनस पठान, समीउल्ला खान, नजीमुद्दीन, रशीद जावा,एडवोकेट अख्तर खान अकेला, अब्दुल करीम खान, इमरान खान, फारुख जावा,हज कमेटी जिला अध्यक्ष सूफी जहीर अहमद, डॉ मुस्ताक, मौलाना रोनक, उम्र सीआईडी अदि मोजूद रहे
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