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19 जनवरी 2018

#मास्टर_तो_मास्टर_होवे 😜😂


एक मास्टर जी के घर मे 7-8 मास्टर मेहमान आ गए...
मास्टर जी की बीवी बोली, "घर मे चीनी नहीं है, चाय कैसे बनाऊँ?"
मास्टर ने कहा, तुम सिर्फ चाय बनाकर ले आओ, बाकी मै सम्भाल लूंगा ".
बीवी चाय बनाकर ले आई।
मास्टरजी ने कहा," जिस के हिस्से में फिकी चाय आएगी, कल हम सब उनके घर मेहमान बनकर खाने के लिए आएंगे "
सभी मास्टरों ने खुशी से चाय पी ली। एक ने तो यहाँ तक कह दिया, "मेरी चाय मे तो इतनी चीनी है,कि डर है कहीं डायबिटीज ना हो जाए......!!!

*राजस्थान सरकार को हाईकोर्ट से झटका, 'राजीव गांधी' का नाम हटाने वाला आदेश निरस्


राजस्थान की बीजेपी सरकार को हाईकोर्ट से शुक्रवार को बड़ा झटका लगा. कोर्ट ने राजीव गांधी सेवा केंद्र का नाम बदलने वाले सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया है. राज्य सरकार ने 28 दिसंबर 2014 को नोटिफिकेशन जारी करते हुए राजीव गांधी सेवा केंद्र का नाम बदलकर अटल सेवा केंद्र कर दिया था. सरकार के इस आदेश को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है.
पाली सिरोही ऑनलाइन सूत्रो के अनुसार जस्टिस एमएन भंडारी की अदालत ने संयम लोढ़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है. वहीं मामलें में अदालत ने सुझाव दिया है कि ऐसी स्थिति फिर से उत्पन्न नहीं हो ऐसे में स्वाधीनता सेनानियों के नाम पर नाम रखे जाएं. इस मामले में संयम लोढ़ा की याचिका पर पार्थी की ओर से अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने पैरवी की.

क़ुरान का सन्देश


फिर अगर वह लोग बाज़ रहें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (192) और उन से लड़े जाओ यहाँ तक कि फ़साद बाक़ी न रहे और सिर्फ़ ख़ुदा ही का दीन रह जाए फिर अगर वह लोग बाज़ रहे तो उन पर ज़्यादती न करो क्यांेकि ज़ालिमों के सिवा किसी पर ज़्यादती (अच्छी) नहीं (193)
हुरमत वाला महीना हुरमत वाले महीने के बराबर है (और कुछ महीने की खुसूसियत नहीं) सब हुरमत वाली चीजे़ एक दूसरे के बराबर हैं बस जो शख्स तुम पर ज़्यादती करे तो जैसी ज़्यादती उसने तुम पर की है वैसी ही ज़्यादती तुम भी उस पर करो और ख़ुदा से डरते रहो और खू़ब समझ लो कि ख़ुदा परहेज़गारों का साथी है (194)
और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है (195)
और सिर्फ़ ख़ुदा ही के वास्ते हज और उमरा को पूरा करो अगर तुम बीमारी वगै़रह की वजह से मजबूर हो जाओ तो फिर जैसी क़ुरबानी मयस्सर आये (कर दो) और जब तक कु़रबानी अपनी जगह पर न पहुँय जाये अपने सर न मुँडवाओ फिर जब तुम में से कोई बीमार हो या उसके सर में कोई तकलीफ हो तो (सर मुँडवाने का बदला) रोजे़ या खै़रात या कु़रबानी है बस जब मुतमइन रहों तो जो शख्स हज तमत्तो का उमरा करे तो उसको जो कु़रबानी मयस्सर आये करनी होगी और जिस से कु़रबानी ना मुमकिन हो तो तीन रोजे़ ज़ामानए हज में (रखने होगें) और सात रोजे़ जब तुम वापस आओ ये पूरी दहाई है ये हुक्म उस शख्स के वास्ते है जिस के लड़के बाले मस्जि़दुल हराम (मक्का) के बाशिन्दे न हो और ख़ुदा से डरो और समझ लो कि ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब देने वाला है (196)
हज के महीने तो (अब सब को) मालूम हैं (शव्वाल, ज़ीक़ादा, जिलहज) बस जो शख्स इन महीनों में अपने ऊपर हज लाजि़म करे तो (एहराम से आखि़र हज तक) न औरत के पास जाए न कोई और गुनाह करे और न झगडे़ और नेकी का कोई सा काम भी करों तो ख़ुदा उस को खू़ब जानता है और (रास्ते के लिए) ज़ाद राह मुहिय्या करो और सब मे बेहतर ज़ाद राह परहेज़गारी है और ऐ अक़्लमन्दों मुझ से डरते रहो (197)
इस में कोई इल्ज़ाम नहीं है कि (हज के साथ) तुम अपने परवरदिगार के फज़ल (नफ़ा तिजारत) की ख़्वाहिश करो और फिर जब तुम अरफात से चल खड़े हो तो मशअरुल हराम के पास ख़ुदा का जिक्र करो और उस की याद भी करो तो जिस तरह तुम्हे बताया है अगरचे तुम इसके पहले तो गुमराहो से थे (198)
फिर जहाँ से लोग चल खड़े हों वहीं से तुम भी चल खड़े हो और उससे मग़फिरत की दुआ माँगों बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (199)
फिर जब तुम अरक़ान हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह जि़क्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का जि़क्र करते हो बल्कि उससे बढ़ कर के फिर बाज़ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ऐ मेरे परवरदिगार हमको जो (देना है) दुनिया ही में दे दे हालाकि (फिर) आखि़रत में उनका कुछ हिस्सा नहीं (200)

18 जनवरी 2018

वकील साथियों ,,,कहाँ है आपका शीर्ष नेतृत्व ,,कहाँ है ,,,आपके वोटो से निर्वाचित वोह लोग ,,जिन्होंने ,,,राजस्थान के वकीलों के खिलाफ ,,उन्हें परेशांन करने के लिए कई व्यवस्थाएं दी

वकील साथियों ,,,कहाँ है आपका शीर्ष नेतृत्व ,,कहाँ है ,,,आपके वोटो से निर्वाचित वोह लोग ,,जिन्होंने ,,,राजस्थान के वकीलों के खिलाफ ,,उन्हें परेशांन करने के लिए कई व्यवस्थाएं दी ,,कहा है वोह नेतृत्व ,,जो बार कौंसिल जैस लोकतांत्रिक संस्था में प्रशासक लगाकर ,दो वर्ष से भी अधिक वक़्त गुज़रने ,,सुप्रीम कोर्ट के आदेश होने के बाद भी अब तक चुनाव नहीं करवा पा रहे है ,,,,वकील साथियों ,,जांचो परखो ,,स्थानीय ,,क्षेत्रीय समस्याओ के साथ साथ ,,वकीलों के स्वाभिमान ,,अभिमान ,,सुरक्षा को इस चुनाव में मुद्दा बनाओ ,,,जोधपुर में वरिष्ठ वकील ,,सुराणा साहिब की बांह पकड़ कर ,,एक अदना सा पुलिस निरीक्षक ,,उन्हें धक्के मारता है ,,,एक पुलिसकर्मी ,,फौजदारी मुक़दमे में गवाह बने ,,नोटेरी वकील को ,,नोटेरी अधिनियम सहित हाईकोर्ट के निर्देशों का उलंग्घन कर ,,,आतंकवादियों की तरह से पकड़ कर ले जाता है ,,कोटा की अदालत में हंगामा होता है तो ,,सादुलपुर चूरू अदालत के ,,कोर्ट रूम में फायरिंग ,,कर अपराधी लोग ,,जज और वकीलों में दहशत का माहौल बनाते है ,,हर जिला विधिक न्यायिक प्राधिकरण ,,अपने सिस्टम से ,,कई सालो से प्रतिदिन राजस्थान के हर शहर ,हर गली में अखबारी खबरों के अनुसार ,,विधिक शिविर लगाकर लोगो को साक्षर कर रहे है ,लेकिन पड़ोसी को भी पता नहीं शिविर कब लगा ,,,अदालते है तो परिसर नहीं ,,परिसर है तो अदालते नहीं ,,,अदालतों में जज नहीं ,,,,अदालतों से कई किलोमीटर फासले पर इधर उधर बिखरी पढ़ी अदालतें है ,,, वकील पक्षकार परेशांन है ,,,,जज ,वकील पदाधिकारियों की बैठक में ,,जिला स्तर से लेकर ,,प्रदेश स्तर तक कोई ठोस विचारविमर्श कर मुद्दों को सुलझाने के लिए वार्ताएं नहीं ,,इंस्पेक्टिंग जज की ज़िलों में वकीलों को बुलाकर कोई सुझाव ,,कोई जनसुनवाई कार्यक्रम नहीं ,,,,वकीलों को पेंशन ,,सुविधा ,,ऋण सुविधा ,,लाइब्रेरी सुविधा ,,,कार्यालय व्यवस्था के लिए आर्थिक मदद नहीं ,,,विधि मंत्री ,,विधायक ,,सरकारें इस तरफ गंभीर नहीं ,,अदालतों में वकीलों के बैठने के लिए चेंबर ,,नहीं ,,बैठने के लिए तख्ता लगाने की जगह भी नहीं ,,,,वकीलों को प्रशिक्षण ,,वकीलों को प्रतियोगी परीक्षाओ के लिए कोचिंग व्यवस्था नहीं ,,क्या है हम वकीलों के पास ,,सिवाए परेशानी ,,चेहरे पर तनाव ,,समाज कंटकों का खौफ ,,,आपसी विवाद ,,सियासत ,में फंसी हमारी विचारधारा ,,,वकील साथियों ,,पुरानी घटनाये ,,जज ,,अधिकारियो ,,सरकार के व्यवहार को समझिये ,,,,,हाईकोर्ट की सुनवाई का विकेन्द्रीकरण नहीं ,,इस कार्ययोजना के पीछे का सच समझिये ,,,आने वाले वर्ष 2017 में ,,चमचे ,,चापलूस नहीं ,,ऐसे सक्रिय लोग ,,,जो अब तक ,,आपके हमदर्द बने ,है ,,आपके दुःख दर्द से जुड़े है ,,,आपके दर्द को बाँट रहे है ,,उस दर्द के खिलाफ आवाज़ उठा रहे है ,,,वोह लोग जो आपके साथ नहीं है ,सिर्फ आपके वोट के साथ है ,,आपके हमदर्द सिर्फ और सिर्फ चुनावों में बनते है ,,घर घर आते है ,पार्टियां देते है ,,भोज आयोजित करते है ,,,प्यार जताते है ,,या तो ऐसे लोगो को फिर चुन ले ,,या फिर वोह लोग ,,जो बार कौंसिल में बैठकर ,,वकीलों के खिलाफ लिए गए अब तक के सभी फैसले रद्द कर दे ,,वकीलों के कल्याण के लिए ,शैक्षणिक ,,प्रशिक्षण ,,रोज़गार ,,पेंशन ,,पारिवारिक सुविधाओं सहित ,,उनके एकेडमिक ,,साहित्यिक ,,कार्यालय व्यवस्था ,,,ज्ञानवर्धन ,,स्वाभिमान ,,अभिमान के लिए जो भी सामने हो उससे टकराने वाला हो ,,वरना आपको समझौता करने वाले ,,सरकारी पदों पर जाने वाले ,,जज की लाइन में लगने वाले ,,समझौता करने वाले ,, वकीलों के खिलाफ बन रही नीतियों में हाँ में हाँ मिलाने वाले तो बहुत देख लिए ,अब हमे देखिये ,,,,,,एडवोकेट अख्तर खान अकेला ,,प्रत्याक्षी बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान न्यायालय परिसर कोटा राजस्थान ,,

19 जनवरी शुक्रवार का शुक्रीया ,,ईद की तरह का दिन जुमा ,,अल्लाह का शुक्र है ,,जो इस पाक दिन को ,,हमारे भाई ,,कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य ,,शिक्षाविद डॉक्टर ज़फर की सालगिरह है

19 जनवरी शुक्रवार का शुक्रीया ,,ईद की तरह का दिन जुमा ,,अल्लाह का शुक्र है ,,जो इस पाक दिन को ,,हमारे भाई ,,कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य ,,शिक्षाविद डॉक्टर ज़फर की सालगिरह है ,,उनकी सालगिरह ,,,,योम ऐ पैदाइश,, पर ,,उन्हें ,उनके परिवार ,,उनके साथ खुशियों में शामिल सभी को बधाई ,,मुबारकबाद ,,कहावत है ,,तुम जियो हज़ारो ,साल ,,साल के दिन हो हज़ार ,,बस इस दिन ,,कामयाबी ,,ख़ुशनूदगी ,सह्तयाबी की दुआओं के साथ उनके लिए पुरखुलूस दुआ है ,,अल्लाह की तरफ से भेजी गयी ,,पहली आयत ,,पढ़ो ,,पढ़ो ,,सूरे इक़रा ,,,का हुक्म पालन किया ज़फर मोहम्मद पढ़े ,,पढ़ाने वाले बने फिर विशेषज्ञ बनकर डॉक्टर बने ,,पढ़ो और पढ़ाओ ,,का संदेश भी क़ुरआन का है ,,बस उन्होंने पढ़ा ,,फिर पढ़ाया और अब ,,,खुद ,प्रगति इंटरनेशनल शैक्षणिक ग्रुप के नाम से ,,हर क्षेत्र में ,,केंद्रीय शिक्षा बोर्ड ,,राजस्थान शिक्षा बोर्ड ,,बी ऐड ,,एस टी सी ,,नरसिंग क्षेत्र में ,,शिक्षा की अलख जगा कर अपना क़र्ज़ उतार रहे है ,,,,कोटा में शिक्षाविद डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद समाजसेवा और सियासत में सक्रिय है ,,यह हज के वक़्त हज प्रशिक्षण शिविर के मुख्य प्रबंधक होते है ,,तो समाज के दूसरे कामकाजों में अपनी सियासी पेचीदगियों के बाद भी पेश पेश रहते है ,,कांग्रेस संगठन से जुड़कर डॉक्टर ज़फ़र अपने साथियों के साथ मिलकर हाड़ोती के एक छत्र कोंग्रेसी नेता शान्तिकुमार धारीवाल के नेतृत्व में कांग्रेस को ज़िंदाबाद कह रहे है ,,डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद ने कोटा में ही उन्नीस जनवरी उन्नीस सो अट्ठावन को लिया ,,कोटा राजकीय महाविद्यालय में ही आपने छात्र जीवन से राजनीति का पाठ पढ़ा फिर बी ऐ बाद बी एड किया ,,डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद को शान्तीधारीवाल ने जिलाप्रमुख पद पर रहते हुए शिक्षक का नियुक्ति पत्र दिया बस ,,तब से ही डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद शांतिधरीवाल के निकटतम और वफादार साथियों में से प्रमुख हो गए ,,,,,सरकारी सेवा के दौरान ही डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद ने ड्राइंग में एम ए किया फिर भूगोल में बीज और तेल उत्पादन विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर गुरूजी से महागुरुजी यानि अध्यापक से डॉक्टर बन गए ,,,,डॉक्टर ज़फ़र ज़ीरो से हीरो बनने वाली ऐसी शख्सियत है जिसने निरपराध तरीके से अपनी महनत ,,लगन ,,ईमानदारी से खुद को स्थापित किया ,,शिक्षाविद के रूप में खुद को बुलंद किया ,,प्रगति स्कूल की शुरआत से करोड़ों करोड़ के प्रगती इंटरनेशनल स्कूल के आज आप संचालक है ,,,ख़ुशी की बात यह है के इनके बी एड कॉलेज ,,एस टी सी कॉलेज सहित सात संस्थाएं है जिसमे गरीब छात्र छात्राओं को फीस में भी छूट मिलती है तो उनको इनकी संस्था की तरफ से आवश्यक सुविधाये भी उपलब्ध कराई जाती है ,,,,शिक्षा एक व्यवसाय है लेकिन शिक्षा को एक सेवा एक खिदमत के तोर पर भी ज़िम्मेदारी से आप निभा रहे है ,,,कांग्रेस संगठन में आप शांतिधरीवाल को अपना गुरु अपना मॉडल एम्बेसेडर मानते है और विकट परिस्थितियों में भी आप हमेशा हर दम शांतिधरीवाल ज़िंदाबाद के नारे के साथ उनके साथ रहे है ,,डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद आल इण्डिया मुस्लिम बैकवर्ड क्लासेज़ कांग्रेस संगठन के प्रदेश अध्यक्ष है जबकि मुस्लिम एजुकेशनल सोसाइटी के राष्ट्रीय महासचिव है ,,,,,आप कोटा जिला कांग्रेस में लगातार नो साल उपाध्यक्ष पद पर रहे फिर हज कमेटी के जिला समन्वयक बनाये गए ,,शांति समिति की संभागीय सदस्य रहे ,,कोटा नगरनिगम में सहवारित वार्ड पार्षद रहे और सत्ता पक्ष के दौरान कांग्रेस प्रदेश संगठन में सचिव पद पर रहकर कई ज़िलों के स्वतंत्र रूप से प्रभारी भी रहे ,,,नेतृत्व क्षमता ,,समाजसेवा में अग्रणी ,,,लोगों के कामकाज में आगे रहकर काम आना इनकी फितरत है ,,बिना किसी घमंड के सादगी और सहजता से सभी से मिलना इनका रोज़ का दस्तूर है ,,,शांतिधारीवाल की वफादारी इस क़दर के सारी दुनिया भी इनके अगर खिलाफ हो तो यह शांतिधारीवाल का साथ किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं वोह कहते है जिस नेतृत्व मुझे उंगली पकड़ कर चलना सिखाया उस नेतृत्व से मुंह मोड़ना अहसान फ़रामोशी है और यह मेरी फितरत में हरगिज़ हरगिज़ नहीं ,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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