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22 जुलाई 2017

जनरल वी के सिंह जो एक्सपर्ट थे उन्हें रक्षा का काम नहीं दिया ,,, नतीजा रक्षको की रक्षा व्यवस्था ही गड़बड़ा गयी

तीन साल बेमिसाल ,,रक्षा मंत्री आये गए ,मुख्यमंत्री गोवा से आये ,,रक्षा मामले देखे फिर मुख्यमंत्री बन गए ,,रक्षा कैसे होती है जिन्हे पता नहीं उन्हें विभाग दे दिया ,,जनरल वी के सिंह जो एक्सपर्ट थे उन्हें रक्षा का काम नहीं दिया ,,, नतीजा रक्षको की रक्षा व्यवस्था ही गड़बड़ा गयी ,,,रक्षको के शिविरों पर गिनती के आत्मघाती आतंकवादी घात लगाकर हमले कर ,,हमारे रक्षको को शहीद करते रहे ,,पुरे विश्व में घूम कर अरबो रूपये खर्च करने के बाद भी ,,चीन और पकिस्तान को काबू में नहीं कर पाए ,,उलटे उनके तेवर तीखे ,,उनकी बेहूदगियां ,,बद्तमीज़ियां सर चढ़ कर बोल रही ,,है ,,,ऐसे में देश युद्द युद्ध चीख रहा है ,,पकिस्तान को नेस्तनाबूत करने का के ख्वाब कुछ अंध भक्तो को छोड़ कर देश का हर नागरिक बेसब्री से देख रहा है ,,इस ख्वाब के साकार होने के इन्तिज़ार में है ,,लेकिन जब देश दो तरफ दुश्मनो से घिरा है ,,रोज़ रोज़ घुड़किया मिल रही हो ,,तब हमे पता चले ,,हमारे पास ,,हमारे देश के पास ,हमारी सेना के पास लड़ने के लिए गोला बारूद ही नहीं है ,,,तब हमारे देश की सेना का मनोबल ,,हमारी बढ़ी बढ़ी फेकं फांकी का असर विश्व स्तर पर क्या रहा होगा सोचने की बात है ,,देश के साथ इससे बढ़ा खिलवाड़ क्या होगा के अरबो रूपये के टेक्स वसूली के बाद भी हम देश की रक्षा के लिए ,,दुश्मनो को सबक़ सिखाने के लिए गोला बारूद नहीं खरीद सके ,,सिर्फ जुमले ,,भाषणबाज़ी ,,बाते ,,आरोप प्रत्यारोप ,,विदेश यात्राओं में मंत्री बदलने के कार्यक्रमों में हमने देश को दांव पर लगा दिया ,,,अफ़सोस यह खबर जो छुपा लेना चाहिए थी उस खबर को कैग ने सार्वजनिक कर देश को खतरे में डाल दिया ,,कुछ तो अब होना ही चाहिए ,खेर यह मेरा देश है होसलो का देश है ,,जय जवान जय किसान का देश है ,,हर हाल में दुश्मन से टकराकर उसे चकनाचूर कर देगा ,,लेकिन ऐसी ढील पोल ,,ऐसी सार्वजनिक बयानबाज़ी जो देश को खतरे में डाल दे सेनिको का मनोबल तोड़ दे ,,कुछ कार्यवाही तो होना ही चाहिए ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

झालावाड़ ,,बारूद के ढेर पर है ,,,प्रशासन की सावधानी हटी ,,दुर्घटना घटी

बारूद का शहर झालावाड़ ,,धमाकों का शहर झालावाड़ ,,नारंगियों का शहर झालावाड़ ,,मिट्ठेशाह महाबली ,,पोपा जी का झालावाड़ ,,गागरोन के तोतों का झालावाड़ ,,राजस्थान की मिनी राजधानी ,,महारानी वसुंधरा सिंधिया का ग्रहचुनाव क्षेत्र झालावाड़ ,,बारूद के ढेर पर है ,,,प्रशासन की सावधानी हटी ,,दुर्घटना घटी का माहौल है ,लापरवाही की एक चिंगारी से झालावाड़ के बारूद के ढेर में आग लगने का खतरा है ,,, ,प्रभारी मंत्री और सियासत की चतुराई तो हुई ,,लेकिन वक़्त रहते हालात नहीं संभाले ,,तो हालात दुष्कर हो सकते है ,अल्लाह की राह में समर्पित वक़्फ़ सम्पत्ति ,,जहां शहर ऐ खमूशा बसा है ,,,जहाँ बुज़ुर्ग आराम फरमा है ,,उस जगह को तोड़फोड़ कर तहस नहस करना ,,ज़िंदा लोगो की खरीद फरोख्त कर ,,उन्हें आपस में लड़ा भिड़ा कर ,,चाहे अपना काम निकाल लिया जाए ,,लेकिन शहर ऐ खमूशा में आराम फरमा बुज़ुर्गो की बेहुरमती के बाद उनके गुस्से ,,उनके प्रकोप से कोई भी आज तक बच नहीं सका ,,है उन्हें अपने तख्त ओ गवाना पढ़े है ,,तो सामजिक ज़िल्लत भी उन्हें झेलना पढ़ी है ,,में बात कर रहा हूँ ,,झालावाड़ के ज्वलंत मुद्दे ,,मज़ारो और क़ब्रों को रातो रात चोरो की तरह कुछ समाज के ही अपने लोगो द्वारा ,,समाज को भरोसे में लिए बगैर हटाने के बाद उपजे हालातो की ,,9 जून 2016 छत्तीस ज़िम्मेदार मुसलमानो का प्रशासन से एक समझौता ,,समझौते के बाद एस डी एम का एक आदेश ,,कुछ लोगो की नानुकुर ,,एक साहिब इस मामले को रोकने के लिए वक़्फ़ ट्रिब्यूनल की जगह हाईकोर्ट जा पहुंचे ,,जहां से कार्यवाही खत्म कर वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में मामला ले जाने को कहा गया ,,,वक़्फ़ कमेटी झालावाड़ इस मामले में शामिल नहीं ,,सम्पत्ति वक़्फ़ की और निजी लोग बिना किसी निर्वाचन ,,बिना किसी आम मुसलमान के मेंडेट के ,,क़ब्रों को मिस्मार करने के ठेकेदार बन बैठे ,,खेर जो होना था सो हो गया ,,लेकिन छत्तीस लोगो के इस समझौते को पूरी तरह से प्रभारी मंत्री यूनुस खान की देखरेख में होने के बाद भी लागू नहीं किया गया ,,,सिर्फ गिनती के कुछ लोगो ने रातों रात ,,लोगो की आस्था का केंद्र बने मज़ार को सड़क के नाम पर लापता कर ,दिया ,दूसरे मज़ारात को चबूतरा बताकर छू मंतर कर दिया गया ,,ज़ाहिर है झालावाड़ के आम मुसलमानो में ज़लज़ला आना था ,,लेकिन खतरनाक बात यह है के मुख्यमंत्री के इस ग्रह ज़िले में उनकी और समर्थित मंत्रियों की एक गलती का इन्तिज़ार कर रहे कुछ नाराज़ लोग ऐसे मामलो की तलाश में रहकर इन मुद्दों को भुनाते है ,,,कुछ लोग ऐसे भी हो सकते है जो मुख्यमंत्री के इस ग्रह क्षेत्र में लाठी भाटा ,,आंसूगैस ,,गोलीबारी की जंग करवाकर सियासी फायदा उठा सकते है ,,मुसलमान समाज आपस में लड़ रहा है ,,क़ाज़ी ऐ शहर झालावाड़ की गलती पकड़ कर उनसे नाराज़ कुछ लोग इस मुद्दे को भुना कर खुद जबरिया क़ाज़ी बनने की कोशिशों में जुट गए है ,,कोई भी ऐसा नहीं जो मामले का पुख्ता हल निकाले ,,लेकिन यह सच है ,मुख्यमंत्री साहिबा ,उनके विश्वास पात्र प्रभारी मंत्री और कुछ खास लोगो का यह खेल अगर बिगड़ गया तो राजस्थान में लेने के देने पढ़ सकते है ,,मुख्यमंत्री और उनके नज़दीकी धर्म ,,मज़हब ,, आस्था का वज़न जानते है ,,जब खुद के घर में एक मूर्ति को अदब से ,एक तरफ हिफाज़त से रखने पर इन्हे मंत्री पद से हटाने का दबाव बना और रातो रात मज़हबी रिवायतों के खिलाफ सरकारी बंगले में मंदिर बनाकर पूजा शुरू करवाना पढ़ी ,तो फिर एक मज़ार जहाँ आस्था से जुड़े लोग थे ,,उन्हें फिर वोह हक़ क्यों नहीं दिया ,जाए ,,,खुद प्रशासन ,,मुख्यमंत्री के प्यादो ने हस्ताक्षरित समझौते की पालना नहीं की ,नए क़ब्रिस्तान की ज़मीन अभी सिर्फ सेट ऐ पार्ट की गयी है ,,वक़्फ़ के रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज करवाकर उन्हें सुपुर्दगी में नहीं दी गयी है ,,, सम्पत्तियौं का आधुनिक विकास नहीं हुआ ,है ,,और तो और जो समझौता ,,कुछ गिनती के लोगो ने पुरे झालावाड़ के मुस्लिमों का ठेकेदार बनकर किया था उस लिखित समझौते के तहत पृष्ठ नंबर दो ,,के पैरे ग्राफ संख्या तीन के अंतिम अल्फ़ाज़ों की ज़रा भी पालना नहीं हुई है जिसमे मज़ारात की सुरक्षा का लिखित मुहायदा है ,,किसने तोडा क्यों तोड़ा ,,यह जांच का विषय है ,,आपसी मज़ारात के प्रति आस्था और आस्था नहीं होने के फ़िरक़ों का सवाल हो सकता है ,,लेकिन तत्काल हालात कैसे सुधरे ,,रंजिशे ,,आरोप प्रत्यारोप कैसे ,,रुके ,,झालावाड़ को जलने से कैसे रोका जाए ,,ज्वलंत मुद्दे यह है ,,और ऐसे में क़ाज़ी को हटाया जाए ,,नया क़ाज़ी बनाया जाए ,,यह सब निजी दुश्मनी ,,रंजिश के हथकंडे हो सकते है , , लेकिन लिखित मुहायदे के तहत अगर मज़ारात की आस्थाओं को फिर से बहाल नहीं किया गया ,,तो हालात सुधरना मुश्किल है ,,विकास हो गया ,,सड़क फोरलेन निकल गयी ,मज़ारात एक तरफ कोने में है ,अगर उनको उस कोने की तरफ ,,अतिरिक्त जगह देकर ,,सम्मानित तरीके से स्थापित रहने दिया जाता है ,,उसका अस्तित्व बहाल ,,रखकर ,,आस्थावान लोगो से चादर पोशी ,,फातिहा ख्वानी का कार्यक्रम करने के लिए स्थाई जगह देकर समाधान स्थाई रूप से निकाला जाता है तो ,लोगो के ज़ख्मो पर थोड़ा मलहम लग सकता है ,,,प्रभारी मंत्री ,,मुख्यमंत्री ,,,,प्रशासन ,,उनके चहेते ,,उनके इशारे पर कॉम के जज़्बात के खिलाफ कार्यवाही करने वाले लोगो में अगर ज़रा भी समझ है ,,तो एक दूसरे को नीचा दिखाने ,,क़ाज़ी को हटाने ,नया क़ाज़ी बनाने के मुद्दे खत्म करे ,,एक जुट हो और जो लिखित में मुहायदा है कम से कम उसकी पालना में मज़ारात के अस्तित्व ,,पूर्व हालातो को तो सड़क बचाते हुए बहाल करे ,एक तरफ ,किनारे पर बढ़ाकर अतिरिक्त जगह देकर प्रशासन इस मामले को निपटा सकता है ,,लेकिन अगर देर कर दी ,अगर हठधर्मिता दिखाई और मुख्यमंत्री के ग्रह ज़िले में एक लाठी भी चली ,,ज़रा भी विद्रोह हुआ ,,तो फिर जो सियासी हालात बनेंगे उसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते ,,इसलिए मिल बैठ कर फिर से मसला हल करे ,,जो गलतियां हुई है उन्हें सुधारे ,,अपनी गलतियों के लिए तोबा करे ,,झालावाड़ के आम मुसलमानो से माफ़ी मांगे ,,उन्हें भरोसे में ले ,,और जो सुझाव आया है उस पर विचार करे ,,इंशा अललाह ,,खुदा रहम ,,करेगा इंसाफ करेगा ,,बिगड़े हालातो को फिर से भाईचारा ,,सद्भावना में तब्दील करेगा ,, मज़ारात की आस्थाये बहाल होने पर झालावाड़ फिर से अपने मूल अस्तित्व में लौटेगा ,,प्यार मोहब्बत का वहां फिर से माहौल गर्म होगा ,,देखते है मुख्यमंत्री साहिबा इस गंभीर मुद्दे पर अपना क्या रुख रखती है ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

क़ुरआन का सन्देश

(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा चाहता तो मै न तुम्हारे सामने इसको पढ़ता और न वह तुम्हें इससे आगाह करता क्योंकि मै तो (आखि़र) तुमने इससे पहले मुद्दतों रह चुका हूँ (और कभी ‘वही’ का नाम भी न लिया) (16)
तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते तो जो शख़्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाधे या उसकी आयतो को झुठलाए उससे बढ़ कर और ज़ालिम कौन होगा इसमें शक नहीं कि (ऐसे) गुनाहगार कामयाब नहीं हुआ करते (17)
या लोग ख़ुदा को छोड़ कर ऐसी चीज़ की परसतिश करते है जो न उनको नुकसान ही पहुँचा सकती है न नफा और कहते हैं कि ख़ुदा के यहाँ यही लोग हमारे सिफारिषी होगे (ऐ रसूल) तुम (इनसे) कहो तो क्या तुम ख़़ुदा को ऐसी चीज़ की ख़बर देते हो जिसको वह न तो आसमानों में (कहीं) पाता है और न ज़मीन में ये लोग जिस चीज़ को उसका शरीक बनाते है (18) उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग तो (पहले) एक ही उम्मत थे और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक बात (क़यामत का वायदा) पहले न हो चुकी होती जिसमें ये लोग एख़्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला उनके दरम्यिान (कब न कब) कर दिया गया होता (19)
और कहते हैं कि उस पैग़म्बर पर कोई मोजिज़ा (हमारी ख़्वाहिष के मुवाफिक़) क्यों नहीं नाजि़ल किया गया तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ग़ैब (दानी) तो सिर्फ ख़ुदा के वास्ते ख़ास है तो तुम भी इन्तज़ार करो और तुम्हारे साथ मै (भी) यक़ीनन इन्तज़ार करने वालों में हूँ (20)
और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज़्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिशते) लिखते जाते हैं (21)
वह वही ख़़ुदा है जो तुम्हें खुश्की और दरिया में सैर कराता फिरता है यहाँ तक कि जब (कभी) तुम कश्तियों पर सवार होते हो और वह उन लोगों को बाद मुवाफिक़ (हवा के धारे) की मदद से लेकर चली और लोग उस (की रफ्तार) से ख़ुश हुए (यकायक) कश्ती पर हवा का एक झोंका आ पड़ा और (आना था कि) हर तरफ से उस पर लहरें (बढ़ी चली) आ रही हैं और उन लोगों ने समझ लिया कि अब घिर गए (और जान न बचेगी) तब अपने अक़ीदे को उसके वास्ते निरा खरा करके खुदा से दुआएँ मागँने लगते हैं कि (ख़ुदाया) अगर तूने इस (मुसीबत) से हमें नजात दी तो हम ज़रुर बड़े शुक्र गुज़ार होंगें (22)
फिर जब ख़ुदा ने उन्हें नजात दी तो वह लोग ज़मीन पर (कदम रखते ही) फौरन नाहक़ सरकशी करने लगते हैं (ऐ लोगों तुम्हारी सरकशी का वबाल) तो तुम्हारी ही जान पर है - (ये भी) दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी का फायदा है फिर आखि़र हमारी (ही) तरफ तुमको लौटकर आना है तो (उस वक़्त) हम तुमको जो कुछ (दुनिया में) करते थे बता देगे (23)
दुनियावी जि़दगी की मसल तो बस पानी की सी है कि हमने उसको आसमान से बरसाया फिर ज़मीन के साग पात जिसको लोग और चैपाए खा जाते हैं (उसके साथ मिल जुलकर निकले यहाँ तक कि जब ज़मीन ने (फसल की चीज़ों से) अपना बनाओ सिंगार कर लिया और (हर तरह) आरास्ता हो गई और खेत वालों ने समझ लिया कि अब वह उस पर यक़ीनन क़ाबू पा गए (जब चाहेंगे काट लेगे) यकायक हमारा हुक्म व अज़ाब रात या दिन को आ पहुँचा तो हमने उस खेत को ऐसा साफ कटा हुआ बना दिया कि गोया कुल उसमें कुछ था ही नहीं जो लोग ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके वास्ते हम आयतों को यूँ तफसीलदार बयान करते है (24)
और ख़ुदा तो आराम के घर (बेहाशत की तरफ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत करता है (25)
जिन लोगों ने दुनिया में भलाई की उनके लिए (आखि़रत में भी) भलाई है (बल्कि) और कुछ बढ़कर और न (गुनेहगारों की तरह) उनके चेहरों पर कालिक लगी हुयी होगी और न (उन्हें जि़ल्लत होगी यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहा सहा करेंगे (26)
और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह की सज़ा उसके बराबर है और उन पर रुसवाई छाई होगी ख़ुदा (के अज़ाब) से उनका कोई बचाने वाला न होगा (उनके मुह ऐसे काले होंगे) गोया उनके चेहरे यबों यज़ूर (अंधेरी रात) के टुकड़े से ढक दिए गए हैं यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये उसमें हमेषा रहेंगे (27)
(ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को इकट्ठा करेगें-फिर मुशरेकीन से कहेगें कि तुम और तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीक ज़रा अपनी जगह ठहरो फिर हम वाहम उनमें फूट डाल देगें और उनके शररीक उनसे कहेंगे कि तुम तो हमारी परसतिश करते न थे (28)
तो (अब) हमारे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है हम को तुम्हारी परसतिश की ख़बर ही न थी (29)
(ग़रज़) वहाँ हर शख़्स जो कुछ जिसने पहले (दुनिया में) किया है जाँच लेगा और वह सब के सब अपने सच्चे मालिक ख़ुदा की बारगाह में लौटकर लाए जाएँगें और (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाजि़या (झूठी बातें) करते थे सब उनके पास से चल चंपत हो जाएगें (30)

21 जुलाई 2017

राजस्थान सरकार शिकायत निवारण की बानगी देखिये

राजस्थान सरकार शिकायत निवारण की बानगी देखिये ,वर्ष ,2014 में मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार को अभिभाषक परिषद कोटा द्वारा भेजे ज्ञापन पर 18 जुलाई 2017 पुरे तीन साल बाद नगरविकास न्यास द्वारा आवंटित भूखंड विवाद पर विचार करते हुए ,शीघ्र निस्तारण के निर्देश नगरविकास न्यास को जारी किये गए है ,,,कोटा अभिभाषक परिषद के सदस्यों को कांग्रेस शासन में ,वकीलों को आरक्षित दर पर भूखंड आवंटित किये गए थे ,,लेकिन रियायती दर को लेकर वकील और सरकार में ठन गयी और भाजपा के वर्तमान सांसद ओम बिरला जो उस वक़्त विधायक थे ,,विधायक भवानी सिंह राजावत ,,चंद्रकांता मेघवाल ,,प्रह्लाद गुजंल सहित कई भाजपा नेताओं ने वकीलों को धरने स्थल पर पहुंचकर उनकी पीठ थपथपाते हुए लिखित ,,वचन दिया था ,के वकीलों की मांग जायज़ है ,,उन्हें रियायती दर से भी बहुत कम एक रूपये टोकन पर प्लाट दिए जाना चाहिए ,,इन लोगो ने कोटा प्रेस को खुले रूप से सार्वजनिक तोर पर सीना ठोक कर बयान भी दिया था ,,के हमारी सरकार आते ही दस दिन में वकीलों को रियायती दर पर भूखंड मिल जाएंगे ,, खुद मुख्यमंत्री ने भी वकीलों को परिवर्तन यात्रा के दौरान तात्कालिक अध्यक्ष मनोजपुरी की उपस्थिति में आश्वस्त किया था ,,सरकार बदली ,,वायदा करने वालों की सरकार आ गयी ,,लेकिन वकीलों ने इन नेताओ के ज़मीर को नहीं जगाया ,,इनसे सवालात नहीं किये ,,भूखंडो के बारे इन्होने वायदा वफ़ा क्यों नहीं किये कोई सवाल सार्वजनिक रूप से नहीं किया ,,सरकार बदलते ही भूखंडो को लेकर वकीलों के आंदोलन में परिवर्तन हुआ ,,और पत्र ,ज्ञापन तक कार्यवाही सिमट गयी ,,उस दौरान तात्कालिक अध्यक्ष नरेश शर्मा ,,महासचिव प्रमोद शर्मा ने जून 2014 में मुख्यमंत्री वसुंधरा सिंधिया को ज्ञापन भेज कर ,,वकीलों को भूखंड रियायती दर पर आवंटित करने ,,विसंगतिया दूर करने की मांग की थी ,, कोटा अभिभाषक परिषद के तीन अध्यक्ष बदले ,,इसके बाद कई ज्ञापन जिलाकलेक्टर के ज़रिये भेजे गए ,,कमेटी बनी ,,वार्ता हुई ,,भूखंड रियायती दर पर देने से तो साफ़ इंकार हुआ ,,लेकिन जो क़ीमत कांग्रेस के वक़्त रखी थी ,,उस क़ीमत पर ब्याज ,,पेनेल्टी पर मामला आकर अटक गया ,,पत्रों से मांग की जाती रही ,हाल ही सात जुलाई जनसुनवाई के कोटा अभिभाषक परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री से भी मिले ,,लेकिन राजस्थान सरकार ने तीन साल पुरानी तात्कालिक महासचिव प्रमोद शर्मा के ज्ञापन पर वर्तमान में अट्ठारह जुलाई को एक संदेश के माध्यम से सुचना दी ,,आपकी शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है ,,पोर्टल पर तलाशा तो पता चला तीन साला पुराने ज्ञापन को नगर विकास न्यास कोटा को भेजकर आदेशित किया है के ,प्रकरण का शीघ्र निस्तारण करे ,,,,है न मज़ेदार बात ,,वकीलों की शिकायत के यह हाल है तो फिर और समस्याओ के निस्तारण की बानगी क्या होगी आप समझ सकते है अब ,,नए ज्ञापन ,,नयी शिकायतों का नंबर कब आएगा ,,देखते है ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा अभिभाषक परिषद के पूर्व अध्यक्ष नोटेरी एडवोकेट रमेश कुशवाह

कोटा अभिभाषक परिषद के पूर्व अध्यक्ष नोटेरी एडवोकेट रमेश कुशवाह को ,,नाजायज़ रूप से गिरफ्तार कर ,झूंठे मुक़दमे में फंसाने और प्रताड़ित करने के मामले में सारोला थानाधिकारी झालावाड़ राजस्थान के खिलाफ राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग दिल्ली में कार्यवाही दर्ज होकर अग्रिम आदेश के लिए पत्रावली रखी ञही है ,,,,,ह्यूमन रिलीफ सोसाइटी के महासचिव एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने झालावाड़ ज़िले के सारोला कला के तात्कालिक थानाधिकारी ,,सहित अन्य ज़िम्मेदार लोगो के खिलाफ ,,एडवोकेट रमेश कुशवाह द्वारा सिर्फ दस्तावेज नोटराइज करने ,,पहचानकर्ता की अग्रिम ज़मानत होने ,,रमेश कुशवाह के खिलाफ कोई प्राथमिक सुबूत नहीं होने पर भी ,उन्हें सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश डी के बसु ,,अर्नेश कुमार के निर्देशों के विपरीत ,राजस्थान उच्च न्यायलय के नोटेरी अधिनियम की धारा 13 को लेकर दिए गए दिशानिर्देशों का पालन किये बगैर ,, योजनाबद्ध तरीके से ,,अवकाश के दो दिन पूर्व प्रभावशाली पूंजीपति परिवादी को फायदा पहुंचाने के लिए गिरफ्तार किया ,,परिजनो से बदतमीज़ी की ,,चार हज़ार एक सो बीस रूपये भी निकाल लिए जो लौटाए नहीं ,,,कोटा के वकीलों ने इस मामले में कोटा रेंज के आई जी को भी ज्ञापन दिया ,,लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई ,,एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने इस मामले में राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग में विस्तृत शिकायत रिपोर्ट भेजी थी ,जिस पर विचार के बाद राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग में फ़ाइल संख्या File Number: 111663/CR/2017 पर प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी है ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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